जब महाराजा सूरजमल ने उषा मस्जिद को तोड़कर वापिस उषा मन्दिर बनाया-
महाराजा सूरजमल - भारत के अंतिम हिन्दू सम्राट
बयाना की उषा मस्जिद को तोड़कर उषा मन्दिर बना दिया
आज हम देख रहे हैं कि हिंदूवादी सरकार व इतनी जागृति होते हुए भी अयोध्या में हमारे आराध्य श्री राम का मंदिर नहीं बन पा रहा है।
लेकिन एक समय ऐसा भी था कि एक हिन्दू सम्राट ने मस्जिद को हटाकर वापिस मन्दिर बना दिया था।
राजस्थान के बयाना शहर में एक उषा मन्दिर है जो 965 इशवी में कन्नौज के राजा महिपाल की रानी चित्रलेखा ने भगवान श्री कृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध की पत्नी माता उषा देवी के नाम से बनवाया था।
फिर समय के साथ बदलाव आया और इस क्षेत्र पर मुस्लिमो का शासन हो गया। गुलामवंशी शासक दुष्ट अल्तमश ने 1224 में इस मंदिर को तोड़कर यहां उषा मस्जिद बना दी।
लेकिन समय सदा एक सा नहीं रहता जल्द ही पास ही एक महान हिन्दू शेर महाराजा सुरजमल का जन्म हुआ और 1715 में महाराजा सूरजमल के पिता महाराजा बदन सिंह ने इस जगह से मुस्लिमो को हटाकर हिंदुआ शासन स्थापित किया।हालांकि महाराजा बदन सिंह का जीवन संघर्षमय था उनका ध्यान आंतरिक व बाहरी दुश्मनों से लड़ने में ही रहा।
फिर कुछ वर्षों बाद जब महाराजा सूरजमल को अपनी पूर्वज उषा माता(महाराजा सूरजमल भगवान श्री कृष्ण के वंशज थे) के मंदिर के हालात पता चले तो वे क्रुद्ध हो उठे।
उन्होंने तुरंत आदेश दिया कि मस्जिद को वहां से हटाया जाए, ऐसा सुनते ही उनकी हिन्दू वीर जाट क्षत्रिय सेना ने कुछ ही समय मे मस्जिद उस जगह से हटा दी उसके बाद सम्राट ने हवन यज्ञ आदि करके विधि विधानपूर्वक वहां मन्दिर की दोबारा से स्थापना की।यह मंदिर आज भी है और बयाना की शान ऊंची कर रहा है।वहां एक उषा मस्जिद भी है जो इसी के आस पास है जो मुस्लिमो ने बाद में बचे हुए ढांचे से बनाई थी।
आज फिर हमे महाराजा सूरजमल जैसे शासकों की जरूरत है जो हमारे धर्म के साथ न्याय कर सके और हमारी संस्कृति व स्वाभिमान की रक्षा कर सकें

जय हिंदुआ सूरज महाराजा सूरजमल की।जय जटवाड़ा स्वाभिमान।
महाराजा सूरजमल - भारत के अंतिम हिन्दू सम्राट
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| हिन्दू ह्रदय सम्राट महाराजा सूरजमल |
आज हम देख रहे हैं कि हिंदूवादी सरकार व इतनी जागृति होते हुए भी अयोध्या में हमारे आराध्य श्री राम का मंदिर नहीं बन पा रहा है।
लेकिन एक समय ऐसा भी था कि एक हिन्दू सम्राट ने मस्जिद को हटाकर वापिस मन्दिर बना दिया था।
राजस्थान के बयाना शहर में एक उषा मन्दिर है जो 965 इशवी में कन्नौज के राजा महिपाल की रानी चित्रलेखा ने भगवान श्री कृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध की पत्नी माता उषा देवी के नाम से बनवाया था।
फिर समय के साथ बदलाव आया और इस क्षेत्र पर मुस्लिमो का शासन हो गया। गुलामवंशी शासक दुष्ट अल्तमश ने 1224 में इस मंदिर को तोड़कर यहां उषा मस्जिद बना दी।
लेकिन समय सदा एक सा नहीं रहता जल्द ही पास ही एक महान हिन्दू शेर महाराजा सुरजमल का जन्म हुआ और 1715 में महाराजा सूरजमल के पिता महाराजा बदन सिंह ने इस जगह से मुस्लिमो को हटाकर हिंदुआ शासन स्थापित किया।हालांकि महाराजा बदन सिंह का जीवन संघर्षमय था उनका ध्यान आंतरिक व बाहरी दुश्मनों से लड़ने में ही रहा।
फिर कुछ वर्षों बाद जब महाराजा सूरजमल को अपनी पूर्वज उषा माता(महाराजा सूरजमल भगवान श्री कृष्ण के वंशज थे) के मंदिर के हालात पता चले तो वे क्रुद्ध हो उठे।
उन्होंने तुरंत आदेश दिया कि मस्जिद को वहां से हटाया जाए, ऐसा सुनते ही उनकी हिन्दू वीर जाट क्षत्रिय सेना ने कुछ ही समय मे मस्जिद उस जगह से हटा दी उसके बाद सम्राट ने हवन यज्ञ आदि करके विधि विधानपूर्वक वहां मन्दिर की दोबारा से स्थापना की।यह मंदिर आज भी है और बयाना की शान ऊंची कर रहा है।वहां एक उषा मस्जिद भी है जो इसी के आस पास है जो मुस्लिमो ने बाद में बचे हुए ढांचे से बनाई थी।
आज फिर हमे महाराजा सूरजमल जैसे शासकों की जरूरत है जो हमारे धर्म के साथ न्याय कर सके और हमारी संस्कृति व स्वाभिमान की रक्षा कर सकें

जय हिंदुआ सूरज महाराजा सूरजमल की।जय जटवाड़ा स्वाभिमान।



hinduwadi sarkar ne bhavya Ram mandir ka nirman kr diya hai bhai tumhara sapna pura hua
ReplyDeleteउसकी पुताई तो करा दो
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